
क्या आप सोचते हैं कि योग सिर्फ स्ट्रेचिंग है? नहीं। सही तरीके से रोज़ाना 20–30 मिनट योग करना नींद से लेकर इम्यूनिटी तक सब बदल सकता है। यहां मैं सरल भाषा में बताता/बताती हूँ कि योग क्यों जरूरी है और कैसे शुरू करें ताकि आप तुरंत फायदे महसूस करें।
पहला—तनाव कम होता है। कुछ गहरी सांसें और हल्की आसन आपकी चिंता और हार्मोन बैलेंस को सुधारते हैं। दूसरा—नींद सुधरती है; सादा शवासन और अनुलोम-विलोम रूटीन रात में आराम देता है। तीसरा—पाचन बेहतर होता है; भुजंगासन और वज्रासन जैसे आसन गैस और कब्ज में मदद करते हैं। चौथा—कमर और गर्दन का दर्द घटता है अगर आप रोज टाइट हिप्स और पीठ की मांसपेशियों को खोलते हैं। पाँचवा—बैलेंस और फोकस बेहतर होते हैं, जिससे काम पर एकाग्रता बढ़ती है।
सिर्फ फायदे ही नहीं, योग रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में भी सुधार लाता है—खुराक का ध्यान, ब्रेथिंग कंट्रोल और शरीर की जागरूकता।
आपको महंगी क्लास या विशेषज्ञ योग मैट नहीं चाहिए। ये सरल रूटीन आज से ही कर सकते हैं:
1) वार्म-अप: 3-5 मिनट पैरों और कंधों की हल्की स्ट्रेच।
2) प्राणायाम: 5 मिनट अनुलोम-विलोम (नासिका से डीप ब्रीदिंग)।
3) आसान श्रृंखला (15–20 मिनट): 5-8 बार सूर्य नमस्कार (धीमी गति), फिर ताड़ासन (स्ट्रेच), वृक्षासन (बैलेंस), भुजंगासन (पीठ के लिए), वज्रासन या श्री मुद्रा पाचन के लिए।
4) कूल-डाउन: 5 मिनट शवासन—पूरी सांस और शरीर को रिलैक्स करने दें।
आसानों को धीरे-धीरे बढ़ाएँ। अगर आप फिसलते हैं या दर्द महसूस करते हैं, रुकें और डॉक्टर से सलाह लें।
क्या सुबह बेहतर है या शाम? सुबह हल्का पेट और ताजी हवा सबसे अच्छा है—मगर अगर आपकी दिनचर्या शाम को ही मिलती है तो वही बेहतर है। निरंतरता ज्यादा जरूरी है बनिस्पत सही समय के।
कुछ सावधानियाँ भी जान लें: गर्भावस्था में कुछ आसन टालें, तेज़ चोट या सर्जरी के बाद डॉक्टर से अनुमति लें, और उच्च रक्तचाप या आंख की समस्या हो तो कुछ पोज़िशन से बचें।
आखिर में एक छोटा सा लक्ष्य रखें: पहली सात दिन रोज़ 15 मिनट, फिर धीरे-धीरे बढ़ाएं। बदलाव दिखने में कुछ हफ्ते लगते हैं—लेकिन जब नींद गहरी हो, पाचन सुधरे और आप मानसिक शांति पाएं, तब पता चल जाएगा कि योगा महत्व सिर्फ शब्द नहीं—ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है।