
क्या आपको पता है शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व होता है? यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार आस्विन मास की पूर्णिमा को आता है। खास बात यह है कि इस रात चंद्रमा अपने पूरे आकर्षण के साथ चमकता है। लोग मानते हैं कि इस दिन चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं, इसलिए पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा करने का विशेष महत्व है।
शरद पूर्णिमा के दिन अक्सर लोग उपवास रखते हैं, जो शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए होता है। इसके साथ ही, रातभर जागरण और भजन-कीर्तन भी किए जाते हैं। घरों में चंद्रमा की आराधना और विशेष तरह के मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इस दिन की रात खास उत्साह और श्रद्धा से बिताते हैं।
शरद पूर्णिमा को लेकर लोककथाओं में कई कहानियां प्रसिद्ध हैं। एक कथा के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की छाया मानव जीवन के लिए लाभकारी होती है, और किरणों से बीमारियां दूर होती हैं। इसलिए, लोग नहल-धोकर खुले आकाश के नीचे बैठते हैं ताकि चंद्रमा की किरणें सीधे उन पर पड़ें।
इसके अलावा, कुछ जगहों पर शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहा जाता है, जहां देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे लक्ष्मी पूजन के रूप में मनाया जाता है ताकि वर्ष भर धन-धान्य की प्राप्ति हो। कुछ इलाकों में इस दिन नरसिंह भगवान की भी पूजा होती है।
क्या आपको पता है कि शरद पूर्णिमा की रात को अक्सर तांबे के बर्तन में पानी रखकर चंद्रमा के प्रकाश में रखा जाता है? ऐसा करने से पानी में औषधीय तत्व बढ़ जाते हैं। लोग इस पानी को पीते हैं या फिर इसका उपयोग घरेलू इलाज के लिए करते हैं। यह पारंपरिक मान्यता का हिस्सा है जो स्वास्थ्य लाभ देती है।
अगर आप त्योहार के मौके पर कुछ खास करना चाहते हैं तो शरद पूर्णिमा की रात मंदिर जाकर या घर में परिवार के साथ मिलकर भजन कीर्तन कर सकते हैं। साथ ही, आस-पास के लोगों को खुशियाँ बांटना भी शुभ होता है। इस दिन की रात प्रकृति से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिसका अनुभव दिल और दिमाग दोनों को तरोताजा कर देता है।
तो अगली बार जब शरद पूर्णिमा आए, तो इसे सिर्फ एक त्योहार न समझें बल्कि इसे अपनी संस्कृति का जश्न और आत्मशुद्धि का दिन बनाएं। यहाँ बताई गई जानकारी से आपको इस पावन दिन की असली खूबसूरती समझने में मदद मिलेगी।