जब बिजली, पानी या गैस की आपूर्ति अचानक बंद हो जाती है, तो आपको लगता है कि सिर्फ एक छोटी सी तकनीकी खराबी है? असल में, ये सब पाइपलाइन खराबी, बिजली, पानी, गैस और अन्य बुनियादी सुविधाओं को आपूर्ति करने वाली तकनीकी और भौतिक नेटवर्क की विफलता का ही नतीजा होता है। ये नेटवर्क शहरों की नसों की तरह हैं—एक जगह टूट जाए तो पूरा शहर रुक जाता है।
क्या आपने कभी सोचा कि पानी की आपूर्ति, शहरों में पीने के पानी को पाइपलाइनों के माध्यम से घरों तक पहुंचाने की प्रणाली जब फट जाती है, तो ये सिर्फ नल बंद होने तक सीमित नहीं रहती? दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ऐसी खराबियों के कारण स्कूल बंद हो जाते हैं, अस्पतालों में ऑपरेशन रद्द हो जाते हैं, और लोग घंटों तक पानी के लिए लाइन में खड़े हो जाते हैं। इसी तरह, बिजली आपूर्ति, विद्युत तारों और सबस्टेशनों के माध्यम से बिजली को घरों तक पहुंचाने की प्रणाली जब खराब होती है, तो फैक्ट्रियां बंद हो जाती हैं, डिजिटल सेवाएं टूट जाती हैं, और गर्मी में लोग बिना पंखे के रात बिताते हैं।
गैस की लाइन में भी ऐसी ही समस्याएं होती हैं। जब गैस लाइन, घरों और व्यावसायिक स्थानों में एलपीजी या नैचुरल गैस पहुंचाने के लिए उपयोग की जाने वाली नलियों का नेटवर्क फट जाती है, तो ये सिर्फ रसोई बंद होने तक नहीं रहती—ये जानलेवा भी हो सकती है। 2025 में दिल्ली-यूपी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं के बाद लोगों ने अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी को फिर से डिज़ाइन करना शुरू कर दिया: बिना गैस के खाना बनाना, बिजली के बिना फ्रिज में दूध रखना, और पानी के बिना नहाना। ये सब तब होता है जब बुनियादी ढांचे की देखभाल नहीं की जाती।
ये समस्याएं सिर्फ एक शहर की नहीं, पूरे हरियाणा और उत्तर भारत की हैं। जब बारिश नहीं होती, तो जल आपूर्ति कम हो जाती है। जब बिजली की लाइनें बर्फ में फंस जाती हैं, तो शहर अंधेरे में डूब जाते हैं। और जब गैस की पाइपलाइन टूट जाती है, तो लोगों को अपने घरों के बाहर बिस्तर बिछाना पड़ता है। इन सबके पीछे सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही नजरअंदाजी है।
इस पेज पर आपको ऐसी ही खबरें मिलेंगी—जहां पाइपलाइन खराबी के कारण बिजली गायब हो गई, पानी की नलियां सूख गईं, या गैस की लाइन में फूट लग गई। आप जान पाएंगे कि ये खराबियां कहां हो रही हैं, क्यों हो रही हैं, और आम आदमी को इससे क्या नुकसान हो रहा है। ये सिर्फ खबरें नहीं, बल्कि आपकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं।