कोजागर पूर्णिमा: हरियाणा का प्राचीन त्योहार

कोजागर पूर्णिमा जिसे होलिका पूर्णिमा या तीज भी कहा जाता है, हरियाणा समेत राजस्थान, उत्तर भारत और अन्य कई राज्यों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह त्योहार खासतौर पर महिलाओं के लिए खुशियों और समृद्धि की कामना लेकर आता है। इस दिन महिलाएं सावन के महीने की भादो पूर्णिमा को साधु-संतों की पूजा करती हैं और मां लक्ष्मी के जागरण का व्रत रखती हैं।

इस उपवास को कोजागर व्रत भी कहा जाता है क्योंकि लोग पूरी रात जागते हैं और भजन-कीर्तन करते हुए मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इसका सीधा मतलब है कि मां लक्ष्मी को जगाकर संपत्ति और खुशहाली का आह्वान करना। लोगों का मानना है कि इस दिन रखा गया व्रत आर्थिक और पारिवारिक समृद्धि लाता है।

कोजागर पूर्णिमा की मुख्य परंपराएं

इस दिन महिलाएं पारंपरिक पेड़ पौधों के नीचे दीपक जलाती हैं और मंदिरों में जाकर पूजा करती हैं। होलिका दहन की शाम को अग्नि के समक्ष सामूहिक होली जलती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसके साथ ही आमतौर पर महिलाएं नए कपड़े पहनकर, मेहंदी लगाकर और सज-धज कर मंदिर या घर में पूजा-पाठ करती हैं।

हरियाणा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कोजागर पूर्णिमा पर मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। घर-घर में पकवान बनाए जाते हैं और परिवार के सदस्य मिलकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं। खासकर सावन के मौसम में यह त्योहार मौसम की ताजगी और बढ़ती हरियाली के साथ जुड़ा होता है।

कोजागर पूर्णिमा का त्योहार क्यों है खास?

कोजागर पूर्णिमा हिन्दू कैलेंडर में सावन-भादो के बीच आती है, जो मानसून के बाद खेती और व्यापार के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी से धन और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं ताकि आने वाला साल सफल रहे। महिलाओं द्वारा किया गया व्रत पूरे परिवार की खुशहाली से जुड़ा माना जाता है।

तो यदि आप भी हरियाणा या पड़ोसी राज्यों के त्योहारों में रुचि रखते हैं, तो कोजागर पूर्णिमा के बारे में ज़रूर जानिए। यह सिर्फ एक पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि समृद्धि, एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। आप भी इस दिन अपनी परंपराओं के अनुसार भाग लें और खुशियों से भरपूर त्योहार का आनंद लें।

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शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं, 16 अक्टूबर 2024 को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण चौंसठ कलाओं के साथ प्रकट होता है, और इस रात को खीर चांदनी में रखने की परंपरा है। ये मान्यता है कि देवी लक्ष्मी इस दिन धरती पर आकर जागते हुए लोगों को समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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