
के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने तेलंगाना राज्य की राजनीति को बदल दिया। 2001 में उन्होंने TRS की नींव रखी और 2 जून 2014 को तेलंगाना बनने के बाद वे पहले मुख्यमंत्री बने। उनके काम और फैसले अक्सर चर्चा में रहते हैं — कुछ लोग तारीफ करते हैं तो कुछ सवाल उठाते हैं। आप भी अक्सर सोचते होंगे कि उनकी नीतियाँ असल में किस तरह जनता पर असर डालती हैं?
KCR की सरकार ने कई बड़े प्रोजेक्ट और योजनाएँ शुरू कीं जिन्हें मीडिया और जनता ने ध्यान से देखा। Rythu Bandhu नाम का किसानों को नकद मदद देने वाला कार्यक्रम कृषि समस्या पर सीधा असर दिखाने का दावा करता है। Kaleshwaram जैसे महँगे और बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट ने पानी की आपूर्ति पर केंद्रित किया और जल संसाधन के मुद्दे उठाए। Mission Bhagiratha से नल-से-नल तक पानी पहुंचाने की कोशिश हुई, और Haritha Haram के तहत हरितकरण पर जोर दिया गया।
KCR की राजनीतिक शैली कड़ी और निर्णायक मानी जाती है। उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति से राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने की कोशिश की और 2022 में TRS का नाम बदलकर BRS कर दिया। इस बदलाव के पीछे बड़ा उद्देश्य राष्ट्रीय राजनीति में दखल था। वहीं आर्थिक जांचों और कुछ नीतिगत फैसलों ने उन्हें आलोचनाओं के केंद्र में भी रखा। मीडिया पर चलने वाली खबरों और मामलों के कारण उनकी छवि पर बहस जारी रहती है।
क्या वे वाकई तेलंगाना के विकास के सच्चे वाहक हैं या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा भी इन कदमों में दिखती है? यह सवाल अक्सर उठता है, और हर नया कदम इसकी नई प्रतिक्रिया लाता है।
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