जब बात जाति सर्वेक्षण, देश या राज्य स्तर पर जातियों की जनसंख्या, उनका वितरण और सामाजिक‑आर्थिक स्थिति को मापने के लिए किया गया विस्तृत आँकड़ा संग्रह. Also known as कुल जनगणना सर्वेक्षण, it सरकार को सही योजना बनाने में मदद करता है। इस सर्वेक्षण के बिना सामाजिक संरचना की सटीक समझ मुश्किल है, इसलिए यह कई नीतियों की रीढ़ बनता है।
पहली बार जनगणना, हर दस साल में पूरे देश की जनसंख्या, लिंग, आयु आदि का आधिकारिक रिकॉर्ड का डेटा जाति सर्वेक्षण के साथ मिलकर राष्ट्रीय विकास योजना बनाता है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक संरचना, समाज में विभिन्न जातियों, वर्गों और समूहों के बीच के रिश्ते और भूमिका है, जिससे यह पता चलता है कि कौन सी वर्गीय असमानताएँ मौजूद हैं। सरकारी नीति, जाति सर्वेक्षण के आँकड़ों पर आधारित योजनाएँ, आरक्षण, शिक्षा व स्वास्थ्य कार्यक्रम इस डेटा को लागू करती है। अंत में, आर्थिक वर्गीकरण, आय, संपत्ति और रोजगार के आधार पर सामाजिक समूहों का विभाजन दिखाता है कि कौन‑से समुदाय आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उन्हें कौन‑सी सहायता चाहिए। इस प्रकार, जाति सर्वेक्षण जनगणना, सामाजिक संरचना, सरकारी नीति और आर्थिक वर्गीकरण के बीच एक कड़ी बनकर राष्ट्रीय विकास को दिशा देता है।
अब आप नीचे दी गई खबरों में देखते हैं कि कैसे ये आंकड़े हरियाणा और पूरे भारत की विभिन्न खबरों के साथ जुड़े हैं – चाहे वह आर्थिक रिपोर्ट हो, सामाजिक सुधार की पहल या राजनीति की चर्चा। आगे पढ़ें और जानें कि इस सर्वेक्षण के परिणामों ने हाल की प्रमुख खबरों को कैसे प्रभावित किया।