
क्या आपको पता है कि तेज़ धूप में 10–20 मिनट में भी शरीर ख़तरे में पड़ सकता है? हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर की तापमान नियंत्रण मशीन (शरीर का तापमान विनियमन) फेल कर जाती है और बॉडी का ताप बहुत बढ़ जाता है। यह आपातकाल है — अगर देर हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
सबसे पहले फर्क समझ लें: हीट एक्सहॉस्टन में व्यक्ति पसीना आता है, कमजोर महसूस करता है और उलझन कम होती है। हीट स्ट्रोक में त्वचा गर्म और सूखी हो सकती है, बुखार बहुत तेज़ (अक्सर 40°C के ऊपर), चेतना में कमी, चक्कर, उल्टी या दौरे तक आ सकते हैं।
इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें:
यदि कोई बेहोश या चेतनात्मक रूप से कमजोर हो, तो तुरंत डॉक्टर या एंबुलेंस बुलाएँ।
आपके पास केवल कुछ मिनट हैं—ये सरल कदम मदद कर सकते हैं:
ध्यान रखें: पैरासिटामॉल या अन्य बुखार कम करने वाली दवाएँ हीट स्ट्रोक में असरदार नहीं होती—कूलिंग ही जरूरी है।
कौन ज़्यादा रिस्की ग्रुप हैं? बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, हृदय या श्वास संबंधी मरीज, और बाहर काम करने वाले मजदूर। हरियाणा जैसे गर्म प्रदेशों में खेत मजदूर, निर्माण श्रमिक और सड़क पर काम करने वाले लोग विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं।
रोकथाम सरल है: सुबह-शाम के ठंडे घंटे में काम करें, 11 बजे से 3 बजे तक धूप में कम रहें, हल्के और खुले कपड़े पहनें, हर 20–30 मिनट पर पानी पियें और इलेक्ट्रोलाइट लें अगर खूब पसीना आ रहा है। बच्चों और बुज़ुर्गों की निगरानी ज्यादा रखें—उनके कमरे को ठंडा रखें और पानी उपलब्ध रखें।
अंत में, यदि आपको लगता है कि किसी की हालत गंभीर है—बुखार बहुत तेज़, बेहोशी, दौरे या सांस लेने में तकलीफ—तो देरी न करें और नज़दीकी अस्पताल या एम्बुलेंस से संपर्क करें। जल्दी मदद से जान बच सकती है।
गर्मियों में सावधानी अपनाइए, ठीक समय पर ब्रेक और पानी लीजिए—यही असली सुरक्षा है।