
हिंसा एक ऐसी समस्या है जो आज के समाज में कहीं भी, कभी भी सामने आ सकती है। यह सिर्फ शारीरिक हमला ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप में भी हो सकती है। रोज के अखबारों में हम अक्सर ऐसी खबरें पढ़ते हैं जिनमें हिंसा ने किसी परिवार या समाज को तोड़ दिया होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हिंसा क्यों होती है?
अक्सर लोगों के अंदर असंतोष, तनाव या बेचैनी हिंसा की ओर उन्हें ले जाती है। काम की कमी, आर्थिक तंगी, सामाजिक अन्याय, और असमानता भी हिंसा को भड़काने वाले तत्व हैं। कभी-कभी लोग अपने अधिकारों, सम्मान या बस अपनी बात मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। जब संवाद की जगह तर्क नहीं चलता तो हिंसा एक आसान विकल्प बन जाती है।
इसके अलावा, परिवारिक या सामाजिक स्तर पर भी हिंसा सामने आती है जैसे घर में घरेलू हिंसा, स्कूलों में बच्चों के बीच हिंसक व्यवहार या फिर सामाजिक भेदभाव के कारण तनाव। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी ऑनलाइन हिंसा तेजी से बढ़ रही है, जहां गाली-गलौज, धमकी और फाल्स खबरें फैलायी जाती हैं।
पहली बात तो यह कि हिंसा को रोकने के लिए हमें उसके कारणों को समझना होगा। मानसिक तनाव को कम करने के लिए खुलकर बात करना जरूरी है। अगर कोई समस्या है तो उससे जुड़ी बात को लोग समझें, बातचीत से हल निकालें।
अगर आप या आपकी पहचान में कोई हिंसा का शिकार है, तो चुप न रहें। पुलिस, सामाजिक संगठनों या हेल्पलाइन से मदद लें। समुदायों में जागरूकता फैलाने से भी हिंसा की जड़ें कमजोर होती हैं। बच्चों की शिक्षा में भी अहिंसा और सहिष्णुता के संदेश देने चाहिए ताकि भविष्य में वे भी इसे अपनाएं।
हमारे समाज को पेसिव नहीं बल्कि एक्टिव होना होगा। हिंसा पर अब वक्त है कि हम सामूहिक रूप से खड़े हों और एक शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करें, जहां हर कोई सुरक्षित महसूस करे।
तो अगली बार जब आप हिंसा की खबर सुनें या देखें, तो खुद सोचें कि हम इसे कैसे खत्म कर सकते हैं और किस प्रकार की संवेदनशीलता से इसका सामना करना चाहिए। याद रखें, हिंसा समाप्त होना सभी का फ़र्ज़ है, जिससे हम सब मिलकर एक बेहतर दुनिया बना सकते हैं।