
आपने सुना है गोवर्धन पूजा के बारे में, जो हर साल कार्तिक मास की प्रतिपदा को मनाई जाती है? यह त्योहार भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कथा से जुड़ा है। खासतौर पर हरियाणा में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा का इतिहास बहुत दिलचस्प है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने इस दिन गांव वालों को परंपरागत पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की सलाह दी थी। उनकी यह बात गांववालों ने मानी और आज भी यह परंपरा चली आ रही है।
गोवर्धन पूजा पर मुख्य रूप से गोवर्धन की पूजा होती है। लोग मिट्टी से छोटे-छोटे पर्वत बनाते हैं, उन्हें सजा कर भगवान को अर्पित करते हैं। इस दिन परंपरागत भोजन, जैसे हलवा-पूड़ी का आयोजन आम बात है। खासतौर पर कृष्ण भक्त दान और सेवा में जुट जाते हैं।
हरियाणा के गांवों में इस त्योहार की खुशियां अलग ही रंग भर देती हैं। लोग मिल-जुल कर मेलों का आयोजन करते हैं और पारंपरिक गीत-رقص करते हैं। बच्चे और बड़े सब भगवान कृष्ण की कहानियां सुनते और साझा करते हैं जो इस त्योहार को और भी खास बनाता है।
यह पूजा मानव को प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना सिखाती है। यह हमारे पर्यावरण और धरती की रक्षा का संदेश भी देती है। साथ ही, भगवान कृष्ण की भक्ति और साहस की कहानी हमें अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा देती है।
तो अगली बार जब आप गोवर्धन पूजा देखें या मनाएं, तो यह समझिए कि यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, भक्ति, और प्रकृति के प्रति सम्मान का सुंदर प्रतीक है।