
जब हम खेल की बात करते हैं, तो सबसे जरूरी चीज होती है खिलाड़ी की मेहनत और साफ़-सुथरा खेल। लेकिन कई बार डोपिंग जैसे मामलों से खेल की पवित्रता को चोट पहुंचती है। डोपिंग का मतलब है ऐसी किसी भी चीज़ का इस्तेमाल करना जो खिलाड़ियों को अनैतिक लाभ देती है। यह नियमों के खिलाफ होता है और खिलाड़ी को चुटकी में बाहर कर सकता है।
खेल में डोपिंग केस तब सामने आते हैं जब खिलाड़ी के शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाते हैं। ये पदार्थ खिलाड़ियों की फिजिकल या मेंटल क्षमता को असामान्य रूप से बढ़ाते हैं जिससे मुकाबला अनुचित हो जाता है। इसलिए खेल की निष्पक्षता को बचाने के लिए हर टूर्नामेंट में कड़े एंटी डोपिंग टेस्ट होते हैं।
डोपिंग सिर्फ खिलाड़ी की छवि खराब नहीं करता, बल्कि पूरी टीम और देश की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगती है। कई बार खिलाड़ी भारी जुर्माना या प्रतिबंध झेलते हैं, कुछ तो खेल-से भी हमेशा के लिए बाहर हो जाते हैं। यही वजह है कि खेल संस्थान डोपिंग पर सख्ती से नजर रखते हैं।
एंटी डोपिंग एजेंसियां नियमित जांच करती हैं और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्यवाही करती हैं। खिलाड़ियों को भी खुद को साफ़ रखना होता है, क्योंकि उनके शरीर में कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया तो उनका करियर खतरे में पड़ सकता है। इसलिए तैयारी करते वक्त खिलाड़ी अपने डाइट, सप्लीमेंट्स और दवाइयों पर नजर रखें।
खिलाड़ियों को यह समझना बहुत जरूरी है कि जीत के लिए छोटी-छोटी गड़बड़ियों से बेहतर साफ़ खेल और मेहनत ही असली जीत है। न केवल खिलाड़ी बल्कि कोच, टीम स्टाफ और परिवार वाले भी इसे समझें और सही दिशा दें। समय-समय पर नियमों की अपडेट पर ध्यान देना, सप्लीमेंट लेने से पहले एंटी डोपिंग लिस्ट जांचना जैसे कदम भी जरूरी हैं।
इससे न सिर्फ खिलाड़ी का भविष्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि खेल की भावना भी मजबूत होगी। डोपिंग केस जितने कम होंगे, उतना ही खेलों में प्रतिस्पर्धा और रोमांच बढ़ेगा। इसलिए हम सब की जिम्मेदारी है कि खेल को निष्पक्ष और स्वच्छ बनाए रखें।