
गर्म मौसम में सुनने में आता है: 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा'। यह नाम डरावना है, लेकिन सही जानकारी रखने से आप सुरक्षित रह सकते हैं। नीचे आसान भाषा में बताता हूँ कि यह क्या है, लक्षण कैसे दिखते हैं और रोज़मर्रा की जिंदगी में क्या सावधानी रखें।
Naegleria fowleri एक माइक्रोस्कोपिक अमीबा है जो गर्म, खारे या कम बहने वाले ताजे पानी में मिलती है — जैसे तालाब, लेक, गर्म स्प्रिंग्स और कभी-कभी अनक्लोरीनेटेड स्विमिंग पूल। यह नाक के रास्ते से शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क तक पहुँच सकती है और गंभीर संक्रमण (PAM — primary amoebic meningoencephalitis) कर सकती है। यह पेट या त्वचा से नहीं फैलती और इंसान से इंसान पर आमतौर पर ट्रांसमिशन नहीं होता।
लक्षण आमतौर पर पानी से संपर्क के 1 से 9 दिन बाद दिख सकते हैं। शुरुआती संकेत हैं तेज़ सिरदर्द, बुखार, मतली, उल्टी और गर्दन का जकड़ना। अगर ध्यान न दिया जाए तो हालत जल्द बिगड़ती है — भ्रम, झटके (seizures), और चेतना में गड़बड़ी।
अगर आपने हाल ही में गर्म तालाब या अनक्लोरीनेटेड पानी में नहाया है और ऊपर के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अस्पताल में डॉक्टर सामान्यतः बायोलॉजिकल टेस्ट, सीटी/एमआरआई और ल्यूकेरोस्पाइनल फ्लुइड की जाँच कर इलाज शुरू करते हैं। शुरुआती पहचान और त्वरित इलाज का बड़ा असर पड़ता है।
आप नीचे दिए आसान और व्यवहारिक कदम आज ही अपना सकते हैं:
हरियाणा या आपके स्थानीय इलाके में गर्मी और मानसून के बाद छोटे तालाब और पोखर अधिक जोखिम वाले बन सकते हैं। इसलिए स्थानीय जल स्रोतों और सरकारी जलापूर्ति के बारे में जागरूक रहें। यदि नल का पानी संदिग्ध लगे तो उबालकर या फिल्टर करके उपयोग करें।
याद रखें, यह संक्रमण दुर्लभ है लेकिन गंभीर हो सकता है। सावधानी बरतने और समय पर चिकित्सा सहायता लेने से जोखिम घट सकता है। अगर संदेह हो तो देर न करें — तुरंत नजदीकी अस्पताल या आरजीजी अस्पताल/इमरजेंसी में जाएँ और हालिया पानी संपर्क की जानकारी दें।
कोई भी सवाल हो तो बताइए — मैं बताऊँगा कि स्थानीय पानी की सुरक्षा कैसे जांचें और बच्चों को कैसे सुरक्षित रखें।