अंग प्रत्यारोपण — सरल गाइड और जरूरी जानकारी

क्या आपने कभी सोचा है कि अंग प्रत्यारोपण कैसे काम करता है? जब कोई अंग गंभीर रूप से खराब हो जाता है और दवा से ठीक नहीं होता, तब ट्रांसप्लांट एक विकल्प बनता है। किडनी, लीवर, दिल, फेफड़ा और आँखे जैसे अंगों के ट्रांसप्लांट आज सामान्य हो गए हैं, पर तरीके और कानूनी प्रक्रियाएँ जानना जरूरी है।

टाइप्स: जीवित दाता और दैहिक (cadaveric) दान

दो मुख्य प्रकार हैं — जीवित दाता (living donor) और दैहिक या मस्तिष्क मृत्यु के बाद दान। किडनी और कुछ हिस्सों के लिए जीवित दान संभव है। गंभीर मस्तिष्क चोट या मस्तिष्क मृत घोषित होने पर कई अंग दैहिक दान से मिलते हैं। परिवार की सहमति और कानूनी दस्तावेज़ों की प्रक्रिया हर केस में आवश्यक रहती है।

प्रक्रिया — आसान शब्दों में

सबसे पहले मरीज का मूल्यांकन (evaluation) होता है — ब्लड ग्रुप, इम्यूनोलॉजी और स्वास्थ्य की जाँच। जब उपयुक्त दाता मिल जाता है तो ट्रांसप्लांट टीम सर्जरी का शेड्यूल बनाती है। सर्जरी के बाद मरीज को इम्यूनोसप्रेसिव दवाएँ दी जाती हैं ताकि नया अंग शरीर से न हटे। ये दवाएँ आजीवन ली जा सकती हैं और इनके साइड इफैक्ट्स पर डॉक्टर निगरानी रखते हैं।

भारत में NOTTO और राज्य-स्तरीय रजिस्ट्रियाँ हैं जो अंग ट्रांसप्लांट की निगरानी करती हैं। अस्पतालों का मान्यता प्रमाणपत्र और ट्रांसप्लांट रजिस्टर ज़रूरी होता है। फायनेंस और बीमा कवरेज के बारे में पहले से जानकारी लें — कुछ इलाज महँगा हो सकता है लेकिन कई NGO और सरकारी योजनाएँ मदद करती हैं।

रिकवरी आमतौर पर सर्जरी के बाद के महीनों में होती है। संक्रमण का खतरा, दवाओं के दुष्प्रभाव और जीवनशैली में बदलाव पर ध्यान देना पड़ता है। नियमित चेक‑अप, दवा समय पर लेना और साफ-सफाई पर ध्यान रखना आवश्यक है।

अगर आप दान देना चाहते हैं तो क्या करें? अपने नजदीकी अस्पताल या राज्य ऑर्गन ट्रांसप्लांट रजिस्ट्रेशन (SOTTO/ROTTO) से संपर्क करें। अपने परिवार से खुलकर बात करें और इच्छापत्र (donor card) साथ रखें। ब्रेन डैथ और दान की जानकारी परिवार को पहले से समझा दें — अंतिम निर्णय अक्सर परिवार पर निर्भर करता है।

कौन से सेंटर भरोसेमंद हैं? बड़े सरकारी और निजी संस्थान जैसे AIIMS, बड़े ट्रॉमा सेंटर और जनरल हॉस्पिटल्स के ट्रांसप्लांट विभाग मान्य होते हैं। अस्पताल का प्रमाणन, ट्रांसप्लांट टीम का अनुभव और मरीज रेव्यू पढ़ें।

अंत में, एक छोटा सलाह- अगर आप अंग दान पर विचार कर रहे हैं तो परिवार से बात अभी करें, स्थानीय रजिस्ट्रेशन चेक करें और डॉक्टर से संभावनाएँ स्पष्ट करवाएँ। अंग दान से किसी की ज़िंदगी बचती है — पर सही जानकारी और तैयारी बहुत ज़रूरी हैं।

अमेरिकी व्यक्ति जिसे सूअर की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ था, दो महीने बाद चल बसा

अमेरिकी व्यक्ति जिसे सूअर की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ था, दो महीने बाद चल बसा

अमेरिका में एक ऐतिहासिक सूअर की किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी के करीब दो महीने बाद मरीज की मौत हो गई। यह प्रक्रिया जेनोट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एक सफलता मानी जा रही थी, लेकिन मरीज की मौत ने इस तरह के प्रत्यारोपण की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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