पश्चिम एशिया तनाव: हिमाचल में LPG बुकिंग 35% बढ़ी, मचा हाहाकार

अप्रैल, 9 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका ने अब आम आदमी की रसोई तक दस्तक दे दी है। हिमाचल प्रदेश के लोगों में इस कदर डर बैठा कि मार्च 2026 में रसोई गैस (LPG) की बुकिंग में अचानक 30 से 35 प्रतिशत का उछाल देखा गया। 25 मार्च 2026 को सामने आईं रिपोर्टों के मुताबिक, लोग इस डर से सिलेंडर जमा करने में जुट गए कि आने वाले दिनों में गैस की किल्लत हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार और तेल कंपनियां कह रही हैं कि सप्लाई में कोई कमी नहीं है, लेकिन जनता का भरोसा डगमगा चुका है।

कहते हैं कि डर की आग अक्सर हकीकत से बड़ी होती है। यहाँ भी यही हुआ। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के डिविजनल LPG सेल्स हेड मोहम्मद अमिद, Divisional LPG Sales Head, ने बताया कि फरवरी 2026 में रोजाना औसतन 9,500 बुकिंग्स हो रही थीं। लेकिन मार्च आते-आते यह आंकड़ा रॉकेट की तरह ऊपर चला गया। लोग अपनी जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।

बुकिंग और डिलीवरी के बीच बढ़ती खाई: आंकड़ों का खेल

अगर हम बारीकी से देखें, तो फरवरी और मार्च के बीच का अंतर डराने वाला है। फरवरी के पहले 15 दिनों में हिमाचल में 4,82,341 सिलेंडर बुक हुए थे और 3,86,867 की डिलीवरी हुई। यानी करीब 95,574 सिलेंडरों का गैप था। लेकिन मार्च के पहले 15 दिनों में कहानी पूरी तरह बदल गई। बुकिंग्स बढ़कर 6,45,388 हो गईं, जबकि डिलीवरी सिर्फ 3,16,926 ही हो पाई। इसका मतलब है कि 3,28,462 सिलेंडरों की बुकिंग पेंडिंग है। यह कोई सामान्य बढ़त नहीं, बल्कि सरासर 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) है।

पूरी स्थिति को समझें तो ऐसा लगता है जैसे लोगों को डर है कि कल रसोई ठंडी पड़ जाएगी। (हालांकि अधिकारियों का दावा है कि स्टॉक पर्याप्त है)। इस दबाव ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है।

घरेलू गैस सुरक्षित, पर कमर्शियल सेक्टर में हाहाकार

मोहम्मद अमिद ने यह साफ किया है कि घरेलू रसोई गैस के लिए कोई किल्लत नहीं है। राज्य के सभी 12 जिलों को बद्दी, Una और जालंधर के बॉटलिंग प्लांट्स से सप्लाई मिल रही है। लेकिन असली मुसीबत कमर्शियल गैस सिलेंडर वालों के लिए है।

कमर्शियल सेक्टर में हालात काफी नाजुक हैं। फिलहाल केवल 20 प्रतिशत डिमांड ही पूरी हो पा रही है, और बाकी को राशनिंग के जरिए मैनेज किया जा रहा है। इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने वादा किया है कि आने वाले दिनों में इस सप्लाई को बढ़ाकर 40-50 प्रतिशत तक ले जाया जाएगा। लेकिन तब तक होटल और ढाबा मालिकों की मुश्किलें कम नहीं होने वालीं। यह स्थिति सीधे तौर पर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचा रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और बंद होते ढाबे

इस संकट ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस पूरी स्थिति के लिए केंद्र की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया के देशों, खासकर ईरान जैसे मित्र राष्ट्रों के साथ खराब होते रिश्तों का असर अब हिमाचल की सड़कों पर दिख रहा है।

इसका असर जमीन पर कैसा है? कई हाईवे किनारे चलने वाले ढाबे गैस न मिलने के कारण बंद हो चुके हैं। होटल और रेस्टोरेंट ने अपने मेनू छोटे कर लिए हैं ताकि गैस की खपत कम हो। कुछ ग्रामीण इलाकों में तो लोग वापस 'चूल्हों' पर लौट आए हैं। यह एक विडंबना ही है कि डिजिटल दौर में हम फिर से पारंपरिक तरीके अपनाने को मजबूर हैं।

कांगड़ा में सबसे ज्यादा असर: क्या कहते हैं अधिकारी?

अगर किसी एक जिले की बात करें, तो कांगड़ा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित दिखा। सामान्य दिनों में यहाँ रोजाना 7,500 से 7,700 घरेलू सिलेंडरों की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 9,000 से 10,000 तक पहुँच गई है। यह करीब 20-30 प्रतिशत की असामान्य वृद्धि है।

कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर हेमराज बैरवा का मानना है कि यह पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक डर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में सप्लाई बाधित नहीं हुई है, बल्कि वैश्विक घटनाओं के कारण लोग घबराकर बुकिंग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति: 94% की भारी बढ़त

हिमाचल तो सिर्फ एक उदाहरण है, पूरे भारत में यह डर फैल चुका है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि देश भर में ऑनलाइन LPG बुकिंग में 94 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। संकट के एक शनिवार को सरकार ने देश भर में 55 लाख से ज्यादा रिफिल वितरित किए।

हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के सिस्टम में कोई कमी नहीं दिख रही। इससे यह साबित होता है कि समस्या 'सप्लाई' की नहीं, बल्कि 'परसेप्शन' (धारणा) की है। जब लोग सोशल मीडिया और खबरों में युद्ध की बात सुनते हैं, तो वे सबसे पहले बुनियादी जरूरतों को सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या हिमाचल प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर वास्तव में खत्म हो गए हैं?

नहीं, अधिकारियों और इंडियन ऑयल के मुताबिक घरेलू गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है। बद्दी, ऊना और जालंधर के प्लांट सप्लाई कर रहे हैं। जो किल्लत दिख रही है, वह 'पैनिक बाइंग' के कारण बढ़ी मांग और डिलीवरी गैप की वजह से है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई कितनी प्रभावित है?

कमर्शियल सप्लाई काफी ज्यादा प्रभावित है। फिलहाल केवल 20% डिमांड पूरी हो रही है। सरकार इसे बढ़ाकर 40-50% करने की योजना बना रही है, जिससे ढाबों और होटलों को कुछ राहत मिल सके।

कांगड़ा जिले में बुकिंग्स क्यों बढ़ीं?

कांगड़ा में दैनिक खपत 7,700 से बढ़कर 10,000 सिलेंडर तक पहुँच गई। डिप्टी कमिश्नर हेमराज बैरवा के अनुसार, यह पश्चिम एशिया के तनाव से पैदा हुई उपभोक्ता घबराहट का परिणाम है, न कि सप्लाई चेन की विफलता।

राष्ट्रीय स्तर पर LPG बुकिंग में कितनी वृद्धि हुई?

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इस संकट के दौरान ऑनलाइन LPG सिलेंडर बुकिंग में देशव्यापी स्तर पर 94 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

इस स्थिति का आम जनता और व्यापारियों पर क्या असर पड़ा?

व्यापारियों (विशेषकर ढाबा मालिकों) को अपना काम बंद करना पड़ा या मेनू कम करना पड़ा। आम लोग डर के मारे ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं और कुछ ग्रामीण इलाकों में लोग वापस पारंपरिक चूल्हों का उपयोग करने लगे हैं।