जब कोई फिल्म महिला-नेतृत्व वाली फिल्म कहलाती है, तो ये सिर्फ इस बात का इशारा नहीं करती कि नायिका आगे है — बल्कि ये बताती है कि महिला-नेतृत्व वाली फिल्म, एक ऐसी फिल्म जिसमें महिला किरदार केंद्रीय निर्णय लेती है, अपने समाज को चुनौती देती है, और कहानी का इरादा उसके नेतृत्व से बनता है. ये फिल्में अब सिर्फ अभिनेत्री का नाम लेकर नहीं बल्कि उसकी आवाज़, उसकी चुनौतियों और उसकी जीत के साथ बनती हैं. आज ये फिल्में सिनेमा के साथ-साथ खेल, राजनीति और सामाजिक बदलाव का भी आईना बन चुकी हैं।
इस तरह की फिल्मों के साथ जुड़ी महिला नायिका, एक ऐसी अभिनेत्री जो कहानी का नेतृत्व करती है, न कि सिर्फ सहायक भूमिका में रहती है का रोल अब बहुत अलग हो गया है। जैसे कि GTA VI में Lucia का किरदार — जो सिर्फ एक नायिका नहीं, बल्कि पूरे गेम का नेतृत्व करती है। या फिर ICC महिला विश्व कप 2025 में हर्मनप्रीत कौर जो टीम को लेकर जा रही हैं, और उनकी बल्लेबाज़ी ने देश को जीत दिलाई। ये दोनों ही अलग-अलग दुनियाओं में हैं, लेकिन एक ही संदेश दे रही हैं: फिल्म निर्माण, एक ऐसा उद्योग जहाँ महिलाओं का नेतृत्व अब दर्शकों के लिए नॉर्मल हो रहा है, न कि एक अपवाद।
अगर आप देखें तो ये सब कुछ एक ही धागे से जुड़ा है — लिंग समानता, एक ऐसा सामाजिक बदलाव जिसमें महिलाएँ अपनी क्षमता के आधार पर नेतृत्व करने का अधिकार लेती हैं। इसी वजह से जब भारत की महिला क्रिकेट टीम जीतती है, तो ये सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि एक नए नियम की शुरुआत है। और जब एक फिल्म में महिला नायिका बिना किसी पुरुष के सहारे अपनी जीत बनाती है, तो ये फिल्म बस एक रिलीज़ नहीं, बल्कि एक बयान है।
इस पेज पर आपको ऐसी ही फिल्मों, घटनाओं और व्यक्तित्वों की सूची मिलेगी जो अपने अंदाज़ में महिला-नेतृत्व को बदल रहे हैं। कुछ फिल्में हैं, कुछ क्रिकेट मैच, कुछ रियल-लाइफ जीतें — लेकिन सबका एक ही नाम है: आवाज़ उठाना। और ये आवाज़ अब सुनी जा रही है।