
हर साल जैन धर्म के अनुयायी भगवान महावीर के जन्मदिन को बड़े धूमधाम से मनाते हैं, जिसे महावीर जयंती कहा जाता है। यह दिन अहिंसा, सत्य और संयम का प्रतिनिधित्व करता है। महावीर जयंती का उत्सव हमें जीवन में नैतिकता और शांति का पालन करने की प्रेरणा देता है।
भगवान महावीर 599 ईसा पूर्व जन्मे थे और उन्होंने मानवता को दुखों से उबारने के लिए लगातार तपस्या और उपदेश किए। उनकी शिक्षाएं आज भी जैन धर्म के मुख्य स्तंभ हैं। इस दिन सभी जैन समुदाय के लोग मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं, प्रार्थना करते हैं और दान-पुण्य करते हैं।
महावीर जयंती भगवान महावीर के जयंती उत्सव का प्रमुख अवसर है जो वैशाख की त्रयोदशी को मनाया जाता है। जैन धर्म में यह दिन मानव जीवन के चार प्रमुख मोक्षमार्गों में से एक का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जैन समाज का एकता और धर्म पर आस्था बलवती होती है।
महावीर ने अहिंसा और सत्य को जीवन की सर्वोच्च अवधारणा बताया। उनकी शिक्षाएं न केवल जैन धर्म में बल्कि पूरे भारतीय दर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए यह त्योहार सिर्फ धार्मिकही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी शांति, करुणा और नैतिकता का संदेश फैलाने का दिन है।
इस दिन ज्यादातर जैन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना और कथा कार्यक्रम होते हैं। लोग उपवास रखते हैं और भगवान महावीर के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनते हैं। पारंपरिक रूप से जैन समुदाय के मासिक पूजन और संगत मिलकर भजन-कीर्तन करते हैं।
कुछ स्थानों पर पूरी जाति के लोग बिना हिंसा किए, अहिंसक तरीकों से पात्र लेकर भोजन बाँटने का आयोजन करते हैं। बच्चों और युवाओं को भी इस दिन भगवान महावीर की शिक्षाओं से परिचित कराया जाता है ताकि उनकी गौरवशाली विरासत बनी रहे।
महावीर जयंती इस बात की याद दिलाती है कि अहिंसा और प्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। यह त्योहार हर दिल में सहिष्णुता और सद्भावना का बीज बोता है। इसलिए इस दिन घरों और मंदिरों को सजाने के साथ-साथ एक-दूसरे के साथ भले व्यवहार और संबंध मजबूत करने का संकल्प लें।