
क्रिकेट मैच में जब टीमें निर्धारित समय में जरूरी ओवर नहीं पूरा कर पातीं तो उसे "धीमी ओवर रेट" कहते हैं। सुनने में छोटा लग सकता है, पर इसके असर बड़े होते हैं — मैच फीस कट सकती है, कप्तान पर प्रतिबंध लग सकता है और टूर्नामेंट में टीम की छवि भी प्रभावित होती है।
यह समस्या खासकर टी-20 और वनडे में ज्यादा दिखती है, जहां समय सीमित और तेज़ गति की रणनीतियाँ जरूरी होती हैं। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर मिनट का हिसाब रखा जाता है, इसलिए प्रबंधन में चूक टीम को भारी पड़ सकती है।
अंपायर और मैच अधिकारियों के पास कुछ कारणों के लिए समय बढ़ाने के अधिकार होते हैं — जैसे चोट, DRS के लिए ज्यादा समय, या अन्य औपचारिकताएँ। इसे अलाउंस कहा जाता है। पर ये अलाउंस सीमित होते हैं और हर छोटी बात के लिए नहीं मिलते।
यदि टीम को आवश्यक अलाउंस मिलने के बाद भी ओवर समय पर पूरे नहीं होते, तो मैच रेफरी सजा तय करते हैं। सजा में व्यक्तिगत जुर्माने, कप्तान पर बैन, या लीग में पॉइंट कट जैसी कार्रवाइयां शामिल हो सकती हैं। कुछ टूर्नामेंट में लगातार ओवर रेट के उल्लंघन पर मैच फीस का बड़ा हिस्सा कट जाता है।
थोड़ा प्लानिंग और डिसिप्लिन से बहुत कुछ सुलझ जाता है। कुछ असरदार उपाय ये हैं:
ये टिप्स घरेलू और प्रोफेशनल दोनों स्तरों पर काम आते हैं। छोटे बदलाव अक्सर बड़ा फर्क पैदा करते हैं।
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