जब आप सुनते हैं कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारत सरकार का एकमात्र आधिकारिक एजेंसी जो मौसम के बदलाव को ट्रैक करती है और जनता को चेतावनी देती है. यह IMD नाम से भी जाना जाता है, और यही वो संस्थान है जो आपके फोन पर तूफान की अलर्ट भेजता है. ये सिर्फ एक डिपार्टमेंट नहीं, बल्कि लाखों किसानों, यात्रियों और शहरी लोगों की जान बचाने वाला सुरक्षा नेटवर्क है। जब दिल्ली में हवा में धूल उड़ रही हो और बारिश की उम्मीद हो, तो यही विभाग फैसला करता है कि क्या आपको बारिश के लिए छतरी लेनी है या घर में रहना है।
इसकी जिम्मेदारी सिर्फ बारिश का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि मॉनसन, भारत की जीवन रेखा, जो हर साल जून से सितंबर तक देश को पानी से भर देता है के पैटर्न को समझना है। जब तूफान, एक ऐसी वायु घटना जो समुद्र से बनकर तेज हवाओं और भारी बारिश के साथ तट पर टकराती है जैसे मोंथा बंगाल की खाड़ी में बनता है, तो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के डेटा के बिना दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में लाखों लोग अनजाने में खतरे में पड़ जाते। यह विभाग अक्सर अपने पूर्वानुमानों के आधार पर स्कूल बंद करवाता है, ट्रेनों को रोकता है, और फसलों को बचाने के लिए किसानों को सलाह देता है।
आपने देखा होगा कि कुछ दिनों में केरल और महाराष्ट्र में बारिश हो रही है, जबकि दिल्ली में तापमान 36°C पर पहुँच गया है। यही असमानता भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के काम की असली चुनौती है। वो अब सिर्फ देश के लिए नहीं, बल्कि हर शहर, हर गाँव के लिए अलग-अलग अनुमान बनाता है। इसी वजह से आपके फोन पर आने वाली हर चेतावनी, या फिर टीवी पर आने वाला मौसम का अपडेट — इस विभाग के सैकड़ों वैज्ञानिकों के घंटों के मेहनत का नतीजा है।
इस पेज पर आपको ऐसे ही असली कहानियाँ मिलेंगी — जहाँ मौसम ने किसानों की किस्मत बदल दी, जहाँ तूफान की चेतावनी ने एक शहर को बचा लिया, और जहाँ मॉनसन के देर से आने ने देश की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया। ये सिर्फ खबरें नहीं, बल्कि जीवन के असली बदलाव की कहानियाँ हैं। आप यहाँ देखेंगे कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग कैसे एक आम आदमी के दिन को बदल देता है।