
क्या आप जानते हैं कि भगवान महावीर ने अहिंसा को सिर्फ एक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन का तरीका बताया? जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को नैतिकता और आत्मशुद्धि की ओर प्रेरित करती हैं। उनकी विचारधारा मानवीय मूल्यों पर आधारित है, जिसमें हिंसा से परहेज, सच्चाई और संयम को बेहद अहम माना गया है।
भगवान महावीर ने साधारण जीवन से त्याग और तपस्या के रास्ते पर चलकर आत्मज्ञान प्राप्त किया। उनकी शिक्षा में सबसे बड़ा तत्व था – अहिंसा। उन्होंने माना कि किसी भी जीव को दुख पहुंचाना गलत है। इसके अलावा, सत्य बोलना, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना और माया से मुक्त रहना भी उनके प्रमुख सिद्धांत थे। उनके ये उपदेश लोगों को ईमानदारी और नैतिकता के रास्ते पर चलने की सलाह देते हैं।
जैन धर्म में महावीर को तीर्थंकर माना जाता है, यानी वह गुरु जिनके उपदेशों से लोग मोक्ष की ओर बढ़ते हैं। उनके उपदेश आज भी विश्व भर में जैन समुदाय का मार्गदर्शन करते हैं। सरल शब्दों में, महावीर ने हमें सिखाया कि अपने अंदर की शांति पाने के लिए मन, वचन और कर्म तीनों में संयम जरूरी है। उनके विचार आज भी हमें सिखाते हैं कि जीवन को बिना हिंसा और झूठ के जियें।
संक्षेप में, भगवान महावीर का जीवन हमें अपने कर्मों का जिम्मेदार बनना सिखाता है। उनकी शिक्षाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए जीवन जीने का आदर्श तरीका हैं। आप भी इनके शब्दों को समझकर अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं।