
बाढ़ आने पर सबसे ज़रूरी बात है साफ और तेज़ जानकारी। मौसम बदलते ही स्थानीय प्रशासन, IMD और जिला आपदा प्रबंधन के निर्देश पर ध्यान दें। क्या खाना, दवा, डॉक्यूमेंट सुरक्षित हैं? कितनी देर में घर से निकलना होगा—ये छोटे सवाल बड़ी सुरक्षा तय करते हैं।
अगर बारिश तेज़ है या पानी ऊपर आ रहा है तो समय पर काम लें — देर करने से नुकसान बढ़ता है। नीचे दिए आसान और तुरंत लागू करने वाले कदम अपनाएँ:
पानी के साथ छेड़छाड़ नहीं करें। तेज बहते पानी में चलना या गाड़ी चलाना खतरनाक है। बच्चों और बुज़ुर्गों को सुरक्षित जगह पर रखें। अगर पानी कम गहराई में है भी, बिजली की तारों से दूरी बनाए रखें—इलेक्ट्रीसिटी सबसे बड़ा ख़तरा बन सकती है।
पेयजल सुरक्षित नहीं होगा, इसलिए पानी उबालकर पिएं या बॉतलबंद पानी का उपयोग करें। भोजन को बंद कंटेनरों में रखें ताकि कीड़े और गंदगी न लगे। अस्पताल या क्लिनिक में आने-जाने के लिए पहले कॉल करें ताकि सहायता सुनिश्चित हो।
जानकारी के लिए स्थानीय रेडियो, न्यूज़ वेबसाइट और प्रशासन के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज देखें। हरियाणा में जिला प्रशासन, SDMA और NDRF/SDRF टीमों की घोषणाओं पर अमल करें। आपातकाल में 112 पर कॉल करें।
बच्चों से बात करें कि डर रहे हों तो क्या करना है। पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थान पर रखें और उनकी फ़ीड का इंतज़ाम करें। खेतों में फसल-बाग की प्रोटेक्शन के लिए ऊँचे स्थान पर बीजारोपण या बीज सुरक्षित रखें—किसानों के लिए स्थानीय कृषि विभाग की सलाह फॉलो करना सही रहेगा।
बाढ़ के बाद भी सतर्क रहें: पानी वापस जाने पर कीट और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घावों को साफ रखें, पानी से दूषित खाने-पीने से बचें और जरूरत पड़ने पर वैक्सीनेशन या दवाई लें। मिट्टी और कीचड़ हटाते वक़्त दस्ताने और बूट पहनें।
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छोटी-छोटी तैयारियाँ—बेसिक आपातकालीन किट, परिवार की मीटिंग पॉइंट और निचला-पक्ष का प्लान—आपको और आपके लोगों को बाढ़ में सुरक्षित रख सकती है। परेशानी की घड़ी में तेज़, सही और शांत निर्णय ही फर्क डालते हैं।