सेंसर बोर्ड की कैंची चली 'Kuberaa' पर
फिल्मों की दुनिया में सेंसर बोर्ड की ताजा कार्रवाई ने सबको चौंका दिया है। साउथ के सुपरस्टार धनुष, रश्मिका मंदाना, नागार्जुन अक्किनेनी और जिम सर्भ जैसे सितारों से सजी फिल्म Kuberaa जब सेंसर बोर्ड पहुंची तो उस पर 19 सीन की कैंची चल गई। यह कोई छोटी बात नहीं है—करीब 13 मिनट 41 सेकंड फिल्म से गायब कर दिए गए। अब तेलुगू में फिल्म केवल 181 मिनट की रहेगी, जबकि तमिल में एक मिनट ज्यादा यानी 182 मिनट चलेगी।
सेंसर के इस फैसले से फिल्म बेशक छोटी हो गई, लेकिन इसमें कहानी को ज्यादा तराशने पर जोर दिया गया। जो सीन हटाए गए, उनमें खासतौर पर धनुष के किरदार देव और रश्मिका की समीरा के रोमांचक पल, नागार्जुन के दीपक का एक कैब सीक्वेंस और जिम सर्भ के नीरज के कुछ कड़े दृश्य शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये कट्स फिल्म की कहानी को ज्यादा धार देने और दर्शकों की पकड़ मजबूत करने के लिए किए गए हैं।
फिल्म की कहानी और नए बदलाव
Kuberaa एक सामाजिक थ्रिलर है, जिसमें धनुष पहली बार बिलकुल अलग अंदाज में नज़र आने वाले हैं। फिल्म में देव का किरदार पहले दबा-कुचला और बेबस दिखाया गया है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी जिंदगी में बड़ा ट्विस्ट आता है और वह खुद एक ताकतवर शख्सियत बन जाता है। सेंसर बोर्ड के मुताबिक, ज्यादातर कट्स वहीं किए गए हैं, जहां कहानी की रफ्तार धीमी हो रही थी या अनावश्यक इमोशनल सीन्स खिंच रहे थे।
फिल्म को UA सर्टिफिकेट मिला है, यानी बच्चे और परिवार भी देख सकते हैं—बशर्ते माता-पिता साथ रहें। दिलचस्प ये भी है कि कट्स के बावजूद फिल्म की रिलीज डेट टस से मस नहीं हुई। 'Kuberaa' 20 जून 2025 को तेलुगू, तमिल और हिंदी—तीनों भाषाओं में पूरे भारत में धमाकेदार एंट्री करेगी।
धनुष ने भी शूटिंग के दौरान फिल्म को लेकर कहा था कि उनके लिए यह एक बेहद
Joseph Prakash
जुलाई 20, 2025 AT 10:26सेंसर्स की कैंची ने 'Kuberaa' से 19 सीन काट दीं 😊 अब फिल्म छोटी है पर ताल अभी भी तेज़ है
Arun 3D Creators
जुलाई 20, 2025 AT 13:13Kuberaa की कथा एक ऐसे मोड़ पर पहुँची जहाँ वास्तविकता और कल्पना परस्पर उलझ गए।
धनुष का किरदार देव अब केवल एक नायक नहीं बल्कि अस्तित्व की गूढ़ परिभाषा बन गया।
सेंसर बोर्ड ने 19 सीन काटे यह एक सामाजिक प्रयोग जैसा लगता है।
हर कट कहानी के भीतर छिपी एक शक्ति को उजागर करता है।
रश्मिका की समीरा से जुड़े रोमांस को हटाना भावनाओं के सफर को और धोकाबाज बनाता है।
नागार्जुन का दीपक कैब सीन हटने से फिल्म में रहस्य का स्तर बढ़ता है।
जिम सर्ब के नीरज के दृश्यों को निकालने से एक कड़ापन की धूसरता बिखरती है।
सेंसरशिप के इस दौर में फिल्म के निर्माता को नई चुनौती मिली है।
कहानी की रफ्तार को तेज करने के लिए कट्स को बारीकी से चुना गया है।
दर्शन की दृष्टि से देखें तो यह कट्स मानव संवेदनाओं की सीमाओं को परखते हैं।
फिल्म का UA सर्टिफिकेट अब भी दर्शकों को अनुमति देता है लेकिन अभिभावक की नजरें बारीकी से जाँचेंगी।
समय की कमी का मतलब यह नहीं कि दृश्यों का वजन हल्का हो गया है।
सेंसर बोर्ड का यह कदम शायद नयी रचनात्मकता के द्वार खोल सकता है।
हर सीन के हटने से एक नई संभावनाएं उभरीं हैं।
अंत में, Kuberaa अभी भी एक सामाजिक थ्रिलर के रूप में अपनी जगह पक्की कर रहा है।
RAVINDRA HARBALA
जुलाई 20, 2025 AT 16:00सेंसर बोर्ड का यह कदम ढीले मानकों को दर्शाता है। फिल्म निर्माताओं को पहले से ही सेंसर्ड कंटेंट तैयार रखना चाहिए। दर्शकों की सहनशीलता सीमित है और बड़े कट्स से अनुभव बिगड़ सकता है। यह प्रक्रिया समय और बजट दोनों को नष्ट करती है। अंत में परिणाम दर्शकों की निराशा है।
Vipul Kumar
जुलाई 20, 2025 AT 18:46सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया कई चरणों में चलती है और फिल्म निर्माताओं को पहले से अपने सीन को दिशा‑निर्देशों के अनुसार तैयार करना चाहिए ताकि बाद में बड़े कट्स से बचा जा सके। यदि निर्देशक ने शुरुआती ड्राफ्ट में संभावित समस्यात्मक दृश्यों को पहचान लिया होता तो पोस्ट‑प्रोडक्शन में समय और पैसा बचाया जा सकता था। साथ ही दर्शकों को भी एक संपूर्ण अनुभव मिलता। यह एक सीख है कि प्री‑प्रोडक्शन में ही सावधानी बरतनी चाहिए।
shubham garg
जुलाई 20, 2025 AT 21:33वाह! धनुष की नई एंट्री देखते ही बनती है!