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मां दुर्गा की पूजा से पहले करेंगे ये तैयारियां, तो नवरात्रि में मां होगी प्रसन्न
मां दुर्गा की पूजा से पहले करेंगे ये तैयारियां, तो नवरात्रि में मां होगी प्रसन्न
05 Oct 2018

 

नई दिल्ली: शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है। देवी मां के इन स्वरूपों की पूजा नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है। नवरात्रि के नौ दिन लगातार माता पूजन चलता है। इस बार भी नवरात्र 10 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। और माता आपके सभी दुखों को दूर करने के लिए एक बार फिर से आपके घर आ रही है। तो आइए जानें देवी के इस पावन पर्व पर कैसे करें पूजन की तैयारियां...

 

देवी पूजन की विशेष सामग्री को देहान में रखते हुए माता की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना के लिए चौकी लगाए। और इसके बाद मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर रखने से पहले बिछाने के लिए एक लाल या पीला रंग का कपड़ा ले। साथ ही मां पर चढ़ाने के लिए लाल चुनरी या फिर साड़ी लेना न भुले और नौ दिन पाठ के लिए 'दुर्गासप्तशती' किताब।

 

आपको बते दें कि देवी की पूजा के लिए कलश और ताजा आम के पत्ते धुले हुए। और फूल माला या फूल लेना न भुले। इसी के साथ एक जटा वाला नारियल। और पान, सुपारी, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, सिंदूर, मौली (कलावा), चावल, इन सभी सामाग्री को लेना न भुलें। इसी के साथ अखंड ज्योति जलाने के लिए पीतल या मिट्टी का साफ दीपक, घी, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, दीपक पर लगाने के लिए रोली या सिंदूर, घी में डालने और दीपक के नीचे रखने के लिए चावल जरुर लें।   

 

इसके बाद कलश स्थापना के लिए: एक कलश, कलश और नारियल में बांधने के लिए मौली, 5, 7 या 11 आम के पत्ते, कलश पर स्वास्तिक बनाने के लिए रोली, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल और गंगा जल, और जल में डालने के लिए केसर और जायफल, सिक्का, कलश के नीचे रखने के लिए चावल या गेहूं। इसी के साथ जवारे बोने के लिए: मिट्टी का बर्तन, साफ मिट्टी, जवारे बोने के लिए जौ या गेहूं, मिट्टी पर छिड़कने के लिए साफ जल, मिट्टी के बर्तन पर बांधने के लिए मौली।

 

माता के श्रंगार के लिए: और सबसे आखरी में आता है माता का श्रंगार लाल चुनरी, चूड़ी, बिछिया, इत्र, सिंदूर, महावर, बिंद्दी, मेहंदी, काजल, चोटी, गले के लिए माला या मंगल सूत्र, पायल, और इसी के साथ देवी पूजन में इन बातों का सबसे ज्यादा रखें ध्यान तुलसी पत्ती न चढ़ाएं, माता की तस्वीर या मूर्ति में शेर दहाड़ता हुआ नहीं होना चाहिए, देवी पर दूर्वा नहीं चढ़ाएं, जवारे बोए हैं और अखंड ज्योति जलाई है तो घर खाली न छोड़ें।

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