लिव-इन में रहकर शादी न करना पड़ेगा भारी
लिव-इन में रहकर शादी न करना पड़ेगा भारी
03 Jul 2018

 

नई दिल्ली: आजकल की जनरेशन जितनी ज्यादा खुले विचारों की हो गई है उतनी ही उनके लिए इसमें मुश्किलें भी बढ़ती है। हालहीं में अब युवाओं में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है आज कल के युवा लिव-इन रिलेशन में रहना काफी पसंद करते है। लेकिन इस ट्रेंड का युवतियों को फायदे से ज्यादा नुकसान होता है। युवा लिव-इन में रह तो लेते है लेकिन युवतियों को इस्तेमाल करके उन्हें छोड़ देते है। लेकिन इन अपराधों से छुटकारा पाना के लिए सरकार ने अब ऐसे नियम बना दिए है जिनसे हर युवती को इंसाफ मिलेगा।

 

आपको बता दें कि लिव-इन संबंधों में रह रही महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने और शादी की बात कहकर यौन संबंध बनाने के बाद धोखे देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने सोमवार को यह जांच करने को कहा है कि किसी महिला के साथ लंबे समय तक साथ रहने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने वाला कोई पुरुष अगर महिला के साथ शादी से मुकर जाता है तो क्या उसकी कोई जिम्मेदारी बनती है? इसी के साथ क्या महिला को पत्नी की तरह गुजारा भत्ता, संपत्ति में हिस्से का अधिकार दिया जा सकता है? क्या ऐसे संबंधों को अपने आप ही शादी की तरह देखा जा सकता है? बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे सवालों की पड़ताल करने के लिए तैयार हो गया है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार से उसकी राय मांगी है।

 

मिली जानकारी के मुताबिक जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और अब्दुल नजीर की बेंच ने यह बात कही है कि सुप्रीम कोर्ट लिव इन रिलेशन में रहने वाली महिलाओं को घरेलू हिंसा कानून के तहत आने, गुजारा भत्ता पाने और संपत्ति में हिस्सा पाने के योग्य करार चुका है। इतना ही नहीं अब कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी पूछा है कि क्या लंबे समय तक चले करीबी रिश्तों को 'शादी जैसा' माना जा सकता है? कितने वक्त तक चले रिश्ते को ऐसा दर्जा दिया जाए?

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला बेहद ही अहम मुद्दों को मद्देनजर रखते हुए लिया है। आपको बता दें कि एक व्यक्ति की उस पर लगे रेप के आरोप के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया है। इस व्यक्ति पर आरोप लगाने वाली महिला एक बच्ची की मां है, जो उसके साथ 6 साल से रह रही है। आरोपी ने पहले महिला से शादी का वादा किया था, बाद में मुकर गया।

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