BREAKING NEWS
फोटोशूट के लिए जा रहे छात्रों की गाड़ी ट्रक से टकराई, 3 की दर्दनाक मौत           नगर निगम पर फिर लगा भ्रष्टाचार का आरोप, दो क्लर्क गिरफ्तार            लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी कांग्रेस में छिड़ी जुबानी जंग, राहुल ने उतारी पीएम की नकल            मनोहर राज में सड़कों पर उतरने को मजबूर प्रदेश का कर्मचारी !           शिक्षामंत्री महिलाओं पर हुए महरबान तो अधिकारियों को लगाई फटकार           पिता के बचाव में ये क्या बोल गए दिग्विजय चौटाला            दरिंदो ने नाबालिग को घर में घुसकर बनाया दरिंदगी का शिकार            राहुल गांधी ने फिर लगवाए ‘चौकीदार चोर है’ के नारे            NHM कर्मचारियों की हड़ताल बनी मरीजों के लिए मुसीबत           शहर के नामी अस्पताल में महिला नर्स की संदिग्ध परिस्तिथियों में मौत          
मनोहर राज में सड़कों पर उतरने को मजबूर प्रदेश का कर्मचारी !
मनोहर राज में सड़कों पर उतरने को मजबूर प्रदेश का कर्मचारी !
07 Feb 2019

 

बहादुरगढ़: मनोहर राज में सड़कों पर उतरने को मजबूर है प्रदेश का हर कर्मचारी! एक तरफ एनएचएम के कर्मचारी हड़ताल पर है तो वहीं दूसरी ओर बहादुरगढ़ के छारा गांव में किसान जमीन मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। आपको बता दें कि किसानों की मांग सिर्फ इतनी सी हैं कि उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा साथ लगते गांवो की जमीन से कम नहीं मिलना चाहिए।

 

दरअसल नेशनल हाईवे 334 के लिए छारा और आसपास के कई गांवो की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। छारा के साथ लगते भापड़ौदा गांव की जमीन का मुआवजा करीब सवा करोड़ रूपये दिया जा रहा है जबकि छारा गांव की जमीन का मुआवजा 40 लाख के आसपास दिया जा रहा है। जिसके चलते गांव वालों ने मुआवजा नहीं बढ़ाने की सूरत में अनिश्चितकालीन धरना देने की बात कही है।

 

मिली जानकारी के मुताबिक पिछले चार दिन से किसान धरने पर बैठे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन का कोई नुमाईंदा उनके पास नहीं पहुंचा है। आपको बता दें कि छारा गांव की करीब 85 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है जबकि आसपास के चार गांवो की करीब 75 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। छारा गांव के किसानों का कहना है कि उनकी जमीन दूसरे गांव की जमीन से ज्यादा ऊपजाऊ है और अच्छी फसल पैदावार भी देती है। लेकिन उनके साथ सरकार गलत कर रही है। जिसके बाद धरने पर बैठे किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि जब तक उनका मुआवजा नही बढ़ जाता तब तक वो धरना देते रहेंगे।

 

दरअसल, किसान फिलहाल सड़क के साथ में टेंट लगाकर धरना दे रहे है। लेकिन अगर जल्द किसानों के साथ बातचीत कर मामला नहीं सुलझाया गया तो सड़क के साथ बैठे किसान उत्तेजित होकर सड़क के बीच बैठने से भी गुरेज नहीं करेंगे।

Share this post

Submit to Google Bookmarks Submit to Technorati Submit to Twitter Submit to LinkedIn