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धारा 377 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु
धारा 377 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु
10 Jul 2018

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिगता के खिलाफ जंग शुरु हो चुकि है। समलैंगिगता को अपराध के तहत लाने वाली धारा 377 पर सोमवार को सुनवाई शुरू कर दी गई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई में देरी से इनकार कर दिया था। केंद्र सरकार चाहती थी कि इस मामले की सुनवाई कम से कम चार हफ्तों बाद हो। लेकिन इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही है।

 

आपको बता दे कि पीठ के पांच जजों में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा चार और जज हैं, जिनमें आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा शामिल हैं। इससे पहले, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने केंद्र सरकार के सुनवाई को टालने के आग्रह को ठुकरा दिया है। लेकिन जस्टिस मिश्रा ने कहा कि सुनवाई टाली नहीं जाएगी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस मामले में सरकार को हलफनामा दाखिल करना है जो इस केस में महत्वपूर्ण हो सकता है।

 

सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने यह आदेश आईआईटी के करीब 20 पूर्व और मौजूदा छात्रों, एनजीओ नाज फाउंडेशन और एलजीबीटी राइट एक्टिविस्टों की याचिकाओं पर दिया था। इन याचिकाओं में कहा गया है कि आईपीसी की धारा 377 संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीने का अधिकार और 14 के अंतर्गत समानता का अधिकार का उल्लंघन है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में अपने एक आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के फैसले को बदल दिया था। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 में यह फैसला लिया था कि धारा 377 के मुताबिक किसी पुरुष या फिर महिला जानवर के साथ 'अप्राकृतिक' सेक्स करने पर आजीवन कारावस, 10 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है।

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