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HAPPY HOLI: जानिए विभिन्न परंपराओं के साथ होली मनाने का अंदाज
HAPPY HOLI: जानिए विभिन्न परंपराओं के साथ होली मनाने का अंदाज
11 Mar 2017

 

गुडगांव: भारत विविधताओं का देश, यहां स्थान बदलने के साथ ही बदलती हैं बोलियां, बदलती हैं परंपराएं, बदलता है रहन-सहन, बदलता है त्योहार मनाने का अंदाज़ भी, होली भी एक ऐसा ही त्योहार है जो भारत के अलग अलग प्रदेशों और स्थानों पर विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है, बात अगर देशा प्रदेश हरियाणा की करें, तो यहां होली मनाने का तरीका बरसाने की लठ्ठमार होली की तरह ही है। न जाने कितने रंग हैं होली के तो आइए शुरुआत करें . यूं तो होली का त्योहार भारत के अलग –अलग हिस्सों में अलग अलग तरह से मनाया जाता है, लेकिन उन सभी में बृज की होली का अपना अलग महत्व है, यहां होली सीधे भगवान श्रीकृष्ण के साथ खेली जाती है बृज की होली के कई रंग हैं, जिनमें से प्रसिद्धहै लठ्ठमार होली है.

 

बृज की लठ्ठ मार होली

 

बृज में होली बसंत पंचमी से चैत्र कृष्ण पंचमी तक मनाई जाती है, बृज की होली देशभर में प्रसिद्ध है, बृज के सभी मंदिरों में हर रोज भगवान श्रीकृष्ण के साथ अबीर रंग गुलाल की होली खेली जाती है. लेकिन यहां होली मनाने का एक और तरीका है...वो है लड्डू मार होली....हरियाणा की होली कुछ कुछ बरसाना की लठ्ठ मार होली की तरह ही है. होडल के गांव बलचारी में पिछले 300 सालों से होली गायन, होली नृत्य और पिचकारियों से रंग की बौछारों के साथ साथ बलदाऊ मंदिर में पूजा की एक परंपरा चली आ रही है. बृज की तरह इस गांव में भी लोग होली गायन, पुरुषोँ और महिलाओं के बीच एक महीने तक चलता है, यानि होली से पंद्रह दिन पहले और पंद्रह दिन बाद..

 

आपको बता दें कि बिहार में होली को फाग पूर्णिमा भी कहा जाता है.. दरअसल फाग का मतलब होता है पाउडर और पूर्णिमा का पूरे चांद वाला.... यूपी और बिहार में भारत के दूसरे हिस्सों की ही तरह होली मनाई जाती है.... नदिया के पार फिल्म में दिखाई गई होली, यूपी और बिहार में फगवा की ओर इशारा करती है...बिहार में होली को फगवा इसलिए भी कहते हैं.... क्योंकि ये फाल्गुन मास के अंतिम हिस्से और चैत्र मास के शुरुआती समय में मनाई जाती है...

 

राजस्थान की माली होली

 

अब बात राजा रजवाडाओं के प्रदेश. यानि की राजस्थान की राजस्थान की होली. राजस्थान की होली की बात करें तो उसकी बात ही अलग है यहां की होली तीन तरह से बनाई जाती है. माली होली. गोदा जा की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली...

 

समूचे महाराष्ट्र में होली का रंग और सुरुर एक दो नहीं बल्कि पूरे पांच दिन होता है...होलिका दहन के दूसरे दिन फुरेडी से लेकर रंग पंचमी तक होली पूरे शबाब पर होती है... यहां लोग रंग पंचम का बड़ी बेसब्री से इतंजार करते हैं प्रदेश के कुछ भागों में तो होल से ज्यादा लुत्फ रंग पचमी का लिया जाता है.

 

हिंदू मुस्लिम सिख् इसाई सब आपस में भाई भाई... भारत की धर्मनिपेक्षता की विशेषता रंगों के त्योहार होली में भी दिखा देती है... और होली का ये रंग दिखता है कोलकाता की संस्कृति में... तो आइए रूबरू कराते हैं आपको कोलकाता की होली से....पश्चिम बंगाल में इस उत्सव की शुरुआत नोबेल पुरूस्कार प्राप्त साहित्यकार गुरू रविंद्रनाथ टैगोर ने की थी... गुरूदेव के शांति निकेतन में बसंत उत्सव का ये पर्व बहुत ही सादगी और  गरिमापूर्णतरीके से मनाया जाता है... शांति निकेतन के छात्र छात्राएं न केवल पारंपरिक रंगों से होली खेलते हैं.... बल्कि गीत संगीत नाटक नृत्य के साथ बसंत ऋतु का भी स्वागत किया जाता है.

 

कर्नाटक में होली को कामना हब्बा के नाम से मनाया जाता है. कर्नाटक में होली पर भगवान कामदेव की अराधना और पूजा की जाती है. यहां मान्यता है कि भोले-भंडारी भगवान शिव ने कामदेव को अपने प्रकोप से भस्म किया था तो उसी दिन कामदेव की पत्नी रति के तप, प्रार्थना और तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हे पुनजीवित किया। ये भी होली का एक अलग और अनोखा रंग है.

 

भारत के अनेक प्रांतों में होली को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. पर्व एक है, उल्लास भी एक जैसा ही होता है, बस नाम ही जुदा है, इसीलिए इसे मनाने का अंदाज भी हटकर नहीं है. होली की इस खास पेशकश में इतना ही. होली की आप सभी को शुभकामनाएं.

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