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श्राद्धपक्ष के दौरान पितृलोक से पृथ्वी पर आते है पितर !
श्राद्धपक्ष के दौरान पितृलोक से पृथ्वी पर आते है पितर !
24 Sep 2018

 

नई दिल्ली: आज से आश्विन कृष्ण पक्ष की शुरूआत हो चुकी है जिस श्राद्धपक्ष और पितृपक्ष कहा जाता है। आपको बता दें कि इस पक्ष में मृत्यु प्राप्त व्यक्तिों की मृत्युतिथियों के अनुसार उनका श्राद्ध किया जाता है। बताया जाता है कि श्राद्ध दो प्रकार के होते हैं। पार्वण श्राद्ध और एकोदिष्ट श्राद्ध। गौरतलब है कि आश्विन कृष्ण के पितृपक्ष में किया जानेवाले श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहा जाता है। पार्वण श्राद्ध अपहारण में मृत्यु तिथि के दिन किया जाता है।

 

इसी के साथ पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के महापर्व को पितृपक्ष का श्राद्ध कहा जाता है। इतना ही नहीं जो श्रद्धा से किया जाए उसे श्राद्ध कहा जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के समय को श्राद्ध कहते हैं। धर्म शास्त्र में बताया गया है जो व्यक्ति पितरों को पिंडदान करता है वह गृहस्थ दीर्घायु, यश को प्राप्त करने वाला होता है। पितरों की कृपा से सब प्रकार की समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

 

मिली जानकारी के मुताबिक इस पक्ष के दौरान पितृलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं। आपको बता दें कि 24 सितंबर दिन सोमवार को सुबह सात बजकर 18 मिनट पर चतुर्दशी तिथि की समाप्ति है। सात बजकर 19 मिनट पर पूर्णिमा का प्रारंभ होगा। जो कि 25 सितंबर दिन मंगलवार को सुबह 8 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।

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