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राम के बाद अब हनुमान पर शुरु हुई सियासत, केंद्रीय मंत्री का दावा ‘आर्य’ थे हनुमान जी
राम के बाद अब हनुमान पर शुरु हुई सियासत, केंद्रीय मंत्री का दावा ‘आर्य’ थे हनुमान जी
01 Dec 2018

 

नई दिल्ली: देश में इस वक्त चुनावी माहौल बना हुआ है। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और इन चुनावों में पार्टियां जाति के साथ-साथ भगवान ‘राम’ और ‘हनुमान’ का भी सहारा ले रही हैं। कुछ दिन पहले राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीति अपने चरम पर थी लेकिन अब बीजेपी हनुमान जी को भी राजनीति में ले आई है। दरअसल, राजस्थान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी के स्टार प्रचारक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जी को ‘दलित’ बताया था।

 

उन्होंने कहा था कि ''बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।' हालांकि इसके बाद सीएम योगी की काफी आलोचना भी हुई थी। लेकिन अब केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह ने दावा किया है कि हनुमान जी ‘आर्य’ जाति के थे। उनका कहना है कि उस समय आर्य जाति थी और हनुमान जी उसी आर्य जाति के महापुरुष थे।

 

उन्होंने आगे कहा कि, ''भगवान राम और हनुमान जी के युग में, इस देश में कोई जाति-व्यवस्था नहीं थी। कोई दलित, वंचित और शोषित नहीं था। वाल्मिकी रमायण और रामचरित मानस को आप अगर पढ़ेंगे तो आपको मालूम चलेगा की उस समय कोई जाति व्यवस्था नहीं थी।''

 

अनुसूचित जनजाति के थे हनुमान

             

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के हनुमान जी की जाति पर दिए बयान के बाद एसटी आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने भगवान को अनुसूचित जनजाति का बताया है। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज में हनुमान, गिद्ध सब गोत्र होते है। भगवान राम के साथ लड़ाई में जनजाति वर्ग के लोग उनके साथ थे। उन्होंने कहा कि हनुमान जी दलित नहीं हैं अनुसूचित जनजाति के हैं ।  

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